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महामारी के बीच, छत्तीसगढ़ के प्रवासियो के लिए इंडस एक्शन की मुहिम

30th July 2020 | पंकज साहू

महामारी के बीच, छत्तीसगढ़ के प्रवासियो के लिए इंडस एक्शन की मुहिम

कोरोना महामारी के चलते छत्तीसगढ़ में 20000 के आसपास क्वारंटाइन सेंटर बनाये गए हैं जिसमें बाहर से आये लोगों को आइसोलेट करने की व्यवस्था की गयी है। ये पूरा काम छत्तीसगढ़ पंचायती राज विभाग द्वारा देखा जा रहा है। इंडस एक्शन छत्तीसगढ़ पंचायती राज विभाग के साथ मिलकर बाहर से आये प्रवासी लोगों के मदद के लिए पुरजोर कोशिशें कर रहा है।   

हमने इपोड (EPoD) रिसर्च संस्था के साथ मिलकर सभी क्वारंटाइन सेंटर में रुके हुए प्रवासी लोगों के लिए कुछ बुनियादी सवालों के साथ एक सर्वे का आयोजन किया। ये सर्वे इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण था क्योंकि लोग बहुत ज्यादा परेशान थे और मानसिक तनाव से भी जूझ रहे थे।  

ये सर्वे कॉल के माध्यम से होने थे, जिसके लिए हमें कॉलिंग टीम की जरुरत थी। हमने काफी प्रयासों के बाद कॉलिंग टीम का निर्माण किया जिसमें हमारे छत्तीसगढ़ की कॉलिंग टीम, दिल्ली के शिक्षा सहयोगी, वालंटियर और टीम के मेंबर शामिल थे। सर्वे में सवाल थोड़े ज्यादा थे इसलिए जो भी कॉल कर रहे थे उनमें धैर्य होना जरूरी था; क्वारंटाइन सेंटर में बहुत सारे लोग ऐसे थे जो सिस्टम से नाराज़ थे, हो सकता था उनका गुस्सा हमारे कॉलर्स पर भी निकल जाता। कुछ जगह पर ऐसा हुआ भी, और कहीं-कहीं तो लोग बात करने के लिए भी तैयार नहीं थे। हमें उनसे पूरे धैर्य से काम लेना था। हमारी टीम ने अपने प्रयासों से उनके क्वारंटाइन सेंटर में मिल रही सुविधाओं और उनके तत्काल मदद के बारे में बात किया और टीम के सहयोग से उनकी मदद भी की। 

इस तस्वीर में: इपोड (EPoD) द्वारा रचित सर्वे की एक झलक 

 

इस सर्वे में कुछ कमियाँ बाहर आयी – जैसे कुछ क्वारंटाइन सेंटर में रुकने के लिए साफ़ कमरे नहीं थे, सोने के लिए व्यवस्था नहीं थी, खाना नहीं दिया जा रहा था, महिला और पुरुष के लिए अलग शौचालय नहीं थे आदि। कुछ जगह पर लोगों को तत्काल मेडिकल सुविधा चाहिए था लेकिन बहुत समय क्वारंटाइन सेंटर में रहने के बाद भी उनके लिए व्यवस्था नहीं कराई गयी थी। 

इस सर्वे से मिली सिख द्वारा हम पंचायती राज विभाग छत्तीसगढ़ के साथ मिलकर उन हजारों लोगों के लिए काम कर रहे हैं जो कोरोना महामारी से प्रभावित हुए हैं। बहुत सारे लोग बेरोज़गार हो गए हैं; उनके लिए रोज़गार के दिशा में काम करना, बहुत सारे प्रवासी श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा रुक गयी है; उनके शिक्षा के लिए काम करना, गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ और न्यूट्रिशन पर काम करना और ऐसे अनेक क्षेत्र जो उनके जीवन को प्रभावित करते हों; उनपर काम करना। 

हम एक सामाजिक संस्था के रूप में उन सभी का स्वागत करते हैं जो हमारे काम में हमारी मदद करना चाहते हैं।   

ये पहला अवसर नहीं था जब हम प्रवासी लोगों के लिए कुछ कर रहे थे। हमने छत्तीसगढ़ श्रम विभाग के साथ मिलकर बलोदा बाजार के श्रमिकों, जो अपने राज्य से बाहर काम कर रहे थे, उनके समस्याओं को कॉल करके हल किया; उनको राशन और खाना पहुंचाने के लिए भी काम किया। इनमें से बहुत सारे श्रमिकों की समस्या यह थी कि उनके पास बस उतने ही पैसे बचे थे जिससे वो अपने घर वापस आ सकते थे, या कुछ दिनों के लिए खाने का इंतज़ाम कर सकते थे। लॉकडाउन के कारण उनका घर वापस आना मुश्किल था, और लोगों के पास खाना राशन ख़त्म हो रहा था जिससे वो बहुत बेचैन थे। हमने इनके मदद के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी। 

इस तस्वीर में: बलोदा बाजार कैंपेन के दौरान लोगों को राहत पहुँचते हुए

 

कुछ परिवार जिनसे हम कॉल द्वारा जुड़े, उनमे गर्भवती महिलाएं और नवजात बच्चे भी थे; उनको खाना और इलाज की जरुरत थी जो बहुत मौक़ों पर उनको नहीं मिल पायी। जब हम उनके लिए काम कर रहे थे तो उनके दर्द को महसूस कर पा रहे थे। समय धीरे-धीरे निकल रहा था, कुछ महीनों के बाद जब लॉकडाउन में थोड़ी छूट दी गयी तब उन श्रमिकों के घर वापसी भी सरकार और उनके साथ काम कर रहे लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनकर निकली; इतने सारे लोगों को वापस सही सलामत घर पहुंचाना बड़ी चुनौती थी।  बहुत सारे श्रमिकों ने अपना धैर्य खो दिया और हजारों किलोमीटर दूर अपने घरों के लिए पैदल निकल गए! इसमें उनके जान को खतरा था लेकिन समझाने के बाद भी वो नई मान रहे थे और पैदल ही अपने घरों के लिए निकल गए। सरकार ने भी कई जगह से श्रमिकों के घर वापसी के लिए व्यवस्था कराई; बहुत मसक्कत के बाद लोग अपने अपने गांव/शहर पहुंचे। 

शिक्षा विभाग के साथ उठाये कुछ कदम  

इन सबके अलावा ,हम संवैधानिक अधिकारों जैसे शिक्षा का अधिकार (RTE), न्यूट्रिशन का अधिकार (RTF), और गर्भवती महिलाओं के अधिकार(PMMVY) के लिए काम कर रहे हैं। खास तौर पर हम स्कूल शिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ के साथ शिक्षा का अधिकार धारा 12 के लिए भी काम कर रहे हैं, जिसके अंतर्गत सभी प्राइवेट स्कूलों के प्रारंभिक कक्षाओं में 25% सीट दुर्बल और असुविधाग्रस्त परिवार के बच्चों के लिए आरक्षित होता है। हम सरकार के साथ योजना को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए काम कर रहे हैं; साथ ही लोगों के जागरूकता के लिए कुछ सामाजिक संस्थाओं और मीडिया के मदद से भी काम कर रहे हैं, ताकि लोगों के लिए बनी योजना सभी लाभार्थियों तक सुगमता से पहुंच सके। 

हमारे प्रयासों से भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन हो गयी है जिससे पारदर्शिता बढ़ी है; हम स्कूलों को दी जाने वाली प्रति-पूर्ति राशि को भी सीधे स्कूलों को भुगतान करने के लिए काम कर रहे हैं। हमारे प्रयासों से छत्तीसगढ़ में अब तक लगभग 1.4 लाख से ज्यादा बच्चों का एडमिशन प्राइवेट स्कूलों में हुआ है, वो बच्चे अपने आस पास में प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क पढ़ाई कर रहे हैं। 

महामारी के बीच अभी तक के काम का सफर आसान नहीं था, लेकिन टीम और टीम से बाहर बहुत सारे लोगों ने हमेशा मदद की। इन सभी काम में टीम की लीड सुश्री माधुरी धाड़ीवाल ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया, जब भी लगता है कि मैं कहीं भी अपने आप को शंकाओं से घिरा पाता हूँ तो वो हमेशा मदद करती हैं। टीम के सभी लोग श्रीमती जसमीत कौर, श्रीमती मधु वर्मा, श्रीमती स्मिता मोहंती, श्री सिद्धार्थ प्रेमकुमार और कुमारी दीक्षा मेश्राम का सहयोग हमेशा मिलता है। इंडस एक्शन टीम में अन्य सदस्यों का भी समय समय पर सहयोग मिलते रहता है। कॉलिंग टीम के सभी सदस्यों का भी बहुत आभार कि वो हमेशा किसी भी तरह के कॉलिंग के लिए अपने आप को तैयार रखते है और बस एक बार कहने पर पूरी निष्ठा से अपने  काम को करते हैं।  

(इस लेख को लिखने में श्री कुमार सत्यम ने मेरी पूरी मदद की है; मैं उनका आभार व्यक्त करता हूँ।)

  1. पूरी टीम को बधाई और शुभकामनाएं जिन्होंने इतने बेहतरीन कार्य किये है, यदि सम्भव हो तो समाज एक अन्य लोगो को भी अपने टीम का हिस्सा बनने का अवसर प्रदान करने का कष्ट करें, जिससे सभी आपका सहयोग करते हुए पुण्यलाभ भी कमा सके।

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